कितना आसान था,इश्क़ करना सनम,
कितना मुश्किल तुझे अब भुलाना पड़ा !!
दिल सुबकता रहा, रूह रोती रही,
चेहरा हँसता रहा आँखे नम होगई,
याद चेहरा उसी का फिर भी आता रहा,
बूँद-बूँद मे आँसू बहाता रहा,
कतरा कतरा मिटाई उसकी यादें सभी,
फिर ना आये वो मेरे जहन मे कभी,
नाम उसका मिटाया सभी शह से,
उसके घर के पते पर जो खत थे लिखे,
उन खतो मुझे ही जलाना पड़ा,
कितना मुश्किल तुझे अब भुलान पड़ा।।
रातें दिन होगई, दिन खत्म होगया,
सूर्य निकला नही, चाँद भी सो गया,
छोड़कर तू गई ये भरम सा हुआ,
स्वपन मे भी न मुझको सहन ये हुआ,
तेरे जाते हुए कदमो की आहट हुई,
गहरी नीन्द मे मुझको घबराहट हुई,
श्वास चढ़ सी गई, धड़कने बढ़ गई,
रात की वो घड़ी जान पर पड़ गई,
मुझको नींद से खुदको जगाना पड़ा,
कितना मुश्किल तुझे अब भुलाना पड़ा।।
हम भी दुनिया फिर मुस्कुराकर मिले,
जितने थे गम सभी को भुला कर मिले,
आँसुओं को भी हमको छुपाना पड़ा,
कितना मुश्किल तुझे अब भुलाना पड़ा।।
~ तरुन गोयल
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