जब कोई मुझसे मिलता था,
मै उससे बात करता था,
गिले शिकवे भी होते थे,
मगर ऐसा तो नहीं था,
ये कैसा होगया हूं मैं,
मै कैसा था कभी पहले,
जिन्हें मै भूल बैठा हूँ,
मै उनसे था मिला पहले,
मगर उस वक्त का मुझको,
अब कुछ अच्छा नहीं लगता,
वो बातें, आसमा, दरिया, समंदर,…….सबकुछ तो वैसा है,
मगर कुछ बात है,
मुझको वो अब सच्चा नहीं लगता,
ये कैसा वक़्त आया है,
ये कैसी रंजिशे है संग,
झगड़े पहले भी होते थे,
मगर ऐसा तो नहीं था,
अब तो बेरुखी सी है,
बस एक चिड़चिड़ापन है,
ये कैसा होगया हूं मैं,
मै ऐसा तो नहीं था,
मेरी इस नुमाइश को,
मेरा पैमाना ना समझो,
ये बस एक दौर है
.
.
फिज़ा में….खालीपन सा है,
घटाएं लौट आयेंगी,
ये तन फिर महक जाएगा,
मै वैसा ही बनूंगा फिर,
मै जैसा था कभी पहले ।।
~ तरुन गोयल
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